राष्ट्रीय सेवा योजना (National Service Scheme – NSS)
1. राष्ट्रीय सेवा योजना का परिचय (Introduction)
राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय द्वारा संचालित एक प्रमुख युवा विकास कार्यक्रम है। इसकी शुरुआत 24 सितंबर 1969 को महात्मा गांधी के जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य सामुदायिक सेवा के माध्यम से विद्यार्थियों के व्यक्तित्व एवं चरित्र का विकास करना है। यह योजना महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों को समाज के साथ जोड़कर उनमें सामाजिक उत्तरदायित्व, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और सेवा भावना विकसित करती है।
2. राष्ट्रीय सेवा योजना का इतिहास (History)
स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने शैक्षणिक संस्थानों में राष्ट्रीय सेवा की अवधारणा को प्रोत्साहित किया। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की अध्यक्षता में इस दिशा में विचार-विमर्श हुआ। जनवरी 1950 में केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड की बैठक में विद्यार्थियों एवं शिक्षकों द्वारा स्वैच्छिक श्रम और सामाजिक सेवा किए जाने की संस्तुति की गई।
वर्ष 1958 में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने शैक्षणिक संस्थानों में राष्ट्रीय सेवा कार्यक्रम प्रारंभ करने की आवश्यकता पर बल दिया। मई 1969 में विश्वविद्यालयों के विद्यार्थी प्रतिनिधियों एवं उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच राष्ट्रीय सेवा योजना की रूपरेखा पर सहमति बनी। अंततः 24 सितंबर 1969 को तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. वी.के.आर.वी. राव द्वारा देश के 37 विश्वविद्यालयों में राष्ट्रीय सेवा योजना का शुभारंभ किया गया।
3. राष्ट्रीय सेवा योजना का प्रतीक चिह्न (Symbol of NSS)
राष्ट्रीय सेवा योजना का प्रतीक चिह्न ओडिशा स्थित विश्वप्रसिद्ध कोणार्क सूर्य मंदिर के विशाल रथचक्र से प्रेरित है। यह चक्र जीवन की निरंतरता, गतिशीलता और परिवर्तन का प्रतीक है। इसके आठ पहिए दिन के 24 घंटों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
प्रतीक चिह्न में लाल रंग युवाओं के उत्साह, ऊर्जा और सक्रियता को दर्शाता है, जबकि गहरा नीला रंग ब्रह्मांड का प्रतीक है। यह चिह्न स्वयंसेवकों को समाज और मानवता के कल्याण के लिए निरंतर कार्य करने की प्रेरणा देता है।
4. राष्ट्रीय सेवा योजना का उद्देश्य (Aim of NSS)
राष्ट्रीय सेवा योजना का प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों में सामाजिक कल्याण एवं सामुदायिक सेवा की भावना विकसित करना है। इसके अंतर्गत स्वयंसेवकों को बिना किसी भेदभाव के समाज के जरूरतमंद वर्गों की सहायता करने के लिए प्रेरित किया जाता है।
इसके प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं—
- विद्यार्थियों के व्यक्तित्व एवं चरित्र का विकास करना।
- सामाजिक एवं राष्ट्रीय उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना।
- ग्रामीण एवं शहरी समुदायों की समस्याओं के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना।
- राष्ट्रीय एकता एवं सामाजिक समरसता को प्रोत्साहित करना।
- नेतृत्व क्षमता, सहयोग एवं सामूहिक कार्य की भावना विकसित करना।
- प्राकृतिक एवं मानव निर्मित आपदाओं के समय सहायता प्रदान करना।
- समाज में शिक्षा, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाना।
5. राष्ट्रीय सेवा योजना का संगठनात्मक स्वरूप (Organization)
राष्ट्रीय स्तर पर युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय राष्ट्रीय सेवा योजना का संचालन एवं समन्वय करता है। राज्य स्तर पर राज्य NSS प्रकोष्ठ तथा विश्वविद्यालय स्तर पर विश्वविद्यालय NSS प्रकोष्ठ कार्य करते हैं। महाविद्यालयों में NSS की इकाइयाँ कार्यक्रम अधिकारियों के निर्देशन में संचालित होती हैं।
प्रत्येक महाविद्यालय में उपलब्ध स्वीकृत सीटों एवं विश्वविद्यालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार स्वयंसेवकों का पंजीकरण किया जाता है। कार्यक्रम अधिकारी इन इकाइयों के माध्यम से नियमित गतिविधियों एवं विशेष शिविरों का आयोजन करते हैं।
6. राष्ट्रीय सेवा योजना की गतिविधियों के प्रकार (Types of Activities)
राष्ट्रीय सेवा योजना के अंतर्गत मुख्य रूप से दो प्रकार की गतिविधियाँ संचालित की जाती हैं—
(क) नियमित गतिविधियाँ (Regular Activities)
इन गतिविधियों के अंतर्गत स्वयंसेवक वर्षभर महाविद्यालय एवं समुदाय में विभिन्न सामाजिक कार्यों में भाग लेते हैं। इनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित गतिविधियाँ सम्मिलित हैं—
- महाविद्यालय परिसर एवं सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता।
- वृक्षारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण।
- जल संरक्षण एवं जल जागरूकता अभियान।
- साक्षरता एवं शिक्षा जागरूकता कार्यक्रम।
- स्वास्थ्य परीक्षण एवं रक्तदान शिविर।
- मतदाता जागरूकता अभियान।
- नशामुक्ति एवं सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध अभियान।
- महिला सशक्तीकरण एवं बालिका शिक्षा।
- राष्ट्रीय पर्वों एवं महत्वपूर्ण दिवसों का आयोजन।
- सड़क सुरक्षा एवं यातायात जागरूकता कार्यक्रम।
(ख) वार्षिक विशेष शिविर (Annual Special Camp)
राष्ट्रीय सेवा योजना के अंतर्गत स्वयंसेवकों के लिए विशेष शिविरों का आयोजन किया जाता है। इन शिविरों का आयोजन सामान्यतः ग्रामीण क्षेत्रों अथवा शहरी समुदायों में किया जाता है। इनका उद्देश्य स्वयंसेवकों को समुदाय के निकट लाकर सामाजिक समस्याओं को समझने और उनके समाधान में सहभागी बनाना है।
विशेष शिविरों में स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, स्वास्थ्य जागरूकता, सर्वेक्षण, सामाजिक जागरूकता रैली, सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं सामुदायिक विकास से संबंधित गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं।
7. राष्ट्रीय सेवा योजना का आदर्श वाक्य (Motto of NSS)
राष्ट्रीय सेवा योजना का आदर्श वाक्य 'मैं नहीं, आप' (Not Me, But You) है। यह वाक्य निःस्वार्थ सेवा, त्याग, सहयोग और सामुदायिक कल्याण की भावना को अभिव्यक्त करता है। इसका मूल संदेश है कि व्यक्ति को केवल अपने हितों तक सीमित न रहकर समाज एवं राष्ट्र के व्यापक हितों के लिए कार्य करना चाहिए।
8. राष्ट्रीय सेवा योजना का प्रमाण-पत्र (NSS Certificate)
राष्ट्रीय सेवा योजना के अंतर्गत निर्धारित अवधि एवं कार्य के मानदंडों को पूरा करने वाले स्वयंसेवकों को विश्वविद्यालय द्वारा प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाता है। सामान्यतः दो वर्षों में 240 घंटे की नियमित सेवा एवं निर्धारित विशेष शिविर में सहभागिता प्रमाण-पत्र की पात्रता से संबंधित होती है। प्रमाण-पत्र का निर्गमन संबंधित विश्वविद्यालय के प्रचलित नियमों एवं दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जाता है।
9. राष्ट्रीय सेवा योजना के अंतर्गत महाविद्यालय की गतिविधियाँ (Activities of NSS)
महाविद्यालय की NSS इकाई द्वारा विद्यार्थियों को सामाजिक एवं सामुदायिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इसके अंतर्गत स्वच्छता अभियान, पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण, रक्तदान, स्वास्थ्य जागरूकता, राष्ट्रीय पर्वों का आयोजन तथा विभिन्न सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं।
इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों में सेवा, सहयोग, अनुशासन एवं सामाजिक प्रतिबद्धता की भावना विकसित होती है।
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